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मनो कामनाओं पूर्ति के मंत्र (For Desire)


मंत्रों की शक्ति से हम सभी परिचित हैं। प्रतिदिन की जाने वाली पूजा में मंत्रोच्चारण की अहम भूमिका होती है। इनसे न केवल पूजा संपन्न होती है, बल्कि पूजा करने वाले को भी आत्मिक व मानसिक शांति होती है। केवल शांति ही नहीं, पूजा के दौरान मंत्र जपने से साधक की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। इसलिए शास्त्रों में अलग-अलग मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विभिन्न मंत्रों का उल्लेख किया गया है।
  • जैसे अगर किसी को शिक्षा में उन्नति करनी है, तो उनके लिए मंत्र है, ॐ क्रीं क्रीं क्रीं। इस मंत्र का नियमित 108 की संख्या में जप करने से साधक की एकाग्रता बढ़ती है और वह पढ़ाई में अच्छा कर पाते हैं। 
  • इसी प्रकार अगर मन अशांत है और मोक्ष पाने की लालसा है, तो ॐ श्री ह्रीं क्रीं कृष्णाय स्वाहा: का प्रतिदिन निश्चित संख्या में जप करना लाभप्रद रहेगा।
  • आजकल धन पाने की लालसा लगभग सभी लोगों को होती है। ऐसे में परिश्रम के अनुरूप धन न मिल रहा हो, तो ॐ नमो धनदाय स्वाहा: का जप करना सर्वथा उचित माना गया है। इससे कार्य में प्रगति होगी, जिसके फलस्वरूप धन की प्राप्ति होगी। 
  • यदि कोई चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं, तो उनके लिए ॐ इमिंदर वरदाय क्षेत्रीयमे मा इमाम विश्मेक वर्शम् कृनुत्वान का जप करना चाहिए। चुनाव किसी भी स्तर का हो सकता है। अगर साधक नियमित रूप से परिश्रम के साथ इस मंत्र का निश्चित संख्या में जप करें, तो उन्हें जीत हासिल होने की संभावना बढ़ जाती है। 
  • कई बार ऐसा होता है कि काम में अपेक्षा के अनुसार सफलता नहीं मिल पाती। ऐसे में अगर उम्मीदवार क्षमतावान है, तो मंत्र का जप उन्हें आशानुरूप लाभ दिला सकता है। इसलिए वह अपने काम में सफलता पाने के लिए ॐ नमो सर्वार्थ साधिनी स्वाहा: का जप कर सकते हैं।
  • कुछ लोग काफी जल्दी क्रोध में आ जाते हैं या अपना आपा खो देते हैं। इसलिए उन्हें भी मंत्र जप की शक्ति से काफी लाभ हो सकता है। ऐसे लोग शांत रहने और काम में गति बनाए रखने के लिए ॐ शांत प्रशांते सर्व क्रोध पश्नो स्वाहा: का जप कर सकते हैं। 
  • ॐ नम: शिवाय यह पंचाक्षरी मंत्र के रूप में जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंत्र के नियमित जप से साधक को मोक्ष मिलता है और सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। 
  • अगर किसी को अपने जीवन में देवताओं की हमेशा कृपा चाहिए, तो उसे अष्टाक्षरी मंत्र ॐ नम: नारायणाय का निश्चित संख्या में प्रतिदिन जप करना चाहिए। 
  • इसी प्रकार ॐ गं गणपतये नम: मंत्र भी भगवान गणेश की स्तुति को समर्पित है, जिसका नियमित रूप से 108 बार जप करने से भक्तों को हर तरह की बाधाओं से मुक्ति मिलती है और कार्यों में सफलता सुनिश्चित होती है। 
  • अगर प्रतिदिन ॐ हूं हनुमते रुद्रात्मकाय हूं फट् स्वाहा का जप किया जाए, तो भक्त से हनुमान कभी भी रुष्ट नहीं होंगे। 
  • अगर भक्त ॐ ऐं क्लीं सौं सरस्वत्यै नम: का जप करें, तो उनमें अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न होगी और वह शिक्षा के क्षेत्र में उच्चतम प्रतिष्ठा भी हासिल कर सकते हैं।

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