नव में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। वेदों में वर्णित है कि शक्ति ही ब्रह्मांड की ऊर्जा है और शक्ति के द्वारा ही ब्रह्मांड चलायमान है। इसलिए आद्याशक्ति त्रिपुर सुंदरी महिषासुरमर्दिनी सिंहवाहिनी मां जगदंबा की कृपा प्राप्त करने का स्वर्णिम काल नवरात्र है। इसका अर्थ है नौ अहोरात्र अर्थात् वे नौ दिन, नौ रात की संचालिका तथा संरक्षिका हैं, जो दसों दिशाओं को अपनी कांति से दैदीप्यमान करती हैं। उनके अलौकिक अद्भुत शक्तिमयी रूप को देखकर देव दनुज मनुज, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, पितर सभी विस्मित होकर अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं और उनके शक्तिमयी रूप पर मोहित होकर उनका सानिध्य और भक्ति प्राप्त करने के लिए देवी के कुल 52 सिद्ध शक्तिपीठों में एकांत स्थान पर साधना में लीन हो जाते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र काल में आद्याशक्ति के इस पृथ्वी पर अवतरण का मुख्य उद्देश्य वेदों तथा धर्म संस्कृति की रक्षा करना, दुष्टों का संहार, मानवता की रक्षा तथा दुराचार व अनाचार से धरतीवासियों की रक्षा कर सर्वत्र शांति स्थापित करना है। 28 सितंबर से नवरात्र का आरंभ हो रहा है। इस दौरान देवी नौ स्वरूपों की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि देवी का हर रूप भक्तों के लिए कल्याणकारी होता है। इनकी कृपा दुर्गा सप्तशती के पाठ से भी मिल सकती हैPages
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How to Read Durga Saptashati
नव में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। वेदों में वर्णित है कि शक्ति ही ब्रह्मांड की ऊर्जा है और शक्ति के द्वारा ही ब्रह्मांड चलायमान है। इसलिए आद्याशक्ति त्रिपुर सुंदरी महिषासुरमर्दिनी सिंहवाहिनी मां जगदंबा की कृपा प्राप्त करने का स्वर्णिम काल नवरात्र है। इसका अर्थ है नौ अहोरात्र अर्थात् वे नौ दिन, नौ रात की संचालिका तथा संरक्षिका हैं, जो दसों दिशाओं को अपनी कांति से दैदीप्यमान करती हैं। उनके अलौकिक अद्भुत शक्तिमयी रूप को देखकर देव दनुज मनुज, यक्ष, गंधर्व, किन्नर, पितर सभी विस्मित होकर अपनी सुध-बुध खो बैठते हैं और उनके शक्तिमयी रूप पर मोहित होकर उनका सानिध्य और भक्ति प्राप्त करने के लिए देवी के कुल 52 सिद्ध शक्तिपीठों में एकांत स्थान पर साधना में लीन हो जाते हैं। श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र काल में आद्याशक्ति के इस पृथ्वी पर अवतरण का मुख्य उद्देश्य वेदों तथा धर्म संस्कृति की रक्षा करना, दुष्टों का संहार, मानवता की रक्षा तथा दुराचार व अनाचार से धरतीवासियों की रक्षा कर सर्वत्र शांति स्थापित करना है। 28 सितंबर से नवरात्र का आरंभ हो रहा है। इस दौरान देवी नौ स्वरूपों की पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि देवी का हर रूप भक्तों के लिए कल्याणकारी होता है। इनकी कृपा दुर्गा सप्तशती के पाठ से भी मिल सकती हैGold & Stock Future
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यहाँ पर प्रकाशित सभी साधनाँए समय समय पर टेस्ट की गई हैं। उसके बाद ही इन तत्थों को आपके सामने रखने का प्रयास किया गया हैं। फिर भी यदि किसी साधक को सफलता प्राप्त नहीं हो रही तो अपने गुरु जी से सम्पर्क कर पुनः साधना को शुरु करने की अवश्यकता हैं। असफलता ही सफलता की चाबी हैं। हर असफलता एक लल्कार , एक चुनौती हैं। इस दुनिया में आज जो सफल हैं वो पहले कभी ना कभी असफल ही होगा। हम सब की कार्य क्षमता लगभग मिलती-जुलती ही हैं। अंतर इस बात का हैं कि कितनी जल्दी हम अपनी हार स्वीकार कर लेते है! बिना प्रयास किए अपनी हार मनाना कितना ठीक हैं यह आप सब जानते है। यदि कोई हमारी बातो से सहमत नही हैं या इन सब साधनाओ से सहमत नहीं हैं तो मैं उनसे मेरी प्रार्थना हैं कि आप यह सब बातें दादी जी द्वारा सुनाई गयी परीयों की कहानीयाँ ही समझे।
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